परिचय
दुर्गा सप्तशती / चंडी पाठ | Durga Saptashati (Chandi Paath)
चामुंडा बीज (Chamunda / Chandika Navarna)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
उपयोग: भय, बाधा निवारण और शक्ति‑संकल्प के लिए।
दुं बीज (Durga bija)
ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥
उपयोग: सामान्य तौर पर देवी दुर्गा की आराधना और संकट विनाश के लिए।
दुर्गा गायत्री (Durga Gayatri)
ॐ देवी महामाये विद्महे महाशक्त्यै धीमही तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ॥
उपयोग: ध्यान/ज्ञानवर्धन और देवी की प्रेरणा हेतु।
या देवी सर्वभूतेषु (Devi‑stuti — Devi Mahatmya की आरंभिक स्तुति)
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
उपयोग: पाठ/आद्यक्षया के आरम्भ में स्तुति व समर्पण हेतु।
सर्वमंगलमंगल्ये (Durga‑stuti)
सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ॥
उपयोग: देवी की स्तुति और मंगलफल प्राप्ति हेतु।
ऐगिरीनन्दिनी (Aigiri Nandini — चंडी स्तुति का प्रसिद्ध अंश)
ऐगिरी नन्दिनी नन्दित मेदिनी उच्चल नीलोद्याम् ।
चण्डिका हुम् चण्डमुण्डमथन नभमण्डल आदि ॥
उपयोग: चंडी‑स्तुति में शक्तिशाली स्तवन के रूप में पाठ के समय पढ़ा जाता है।
चंडी नवरत्न / चंडी नवरात्र मंत्र (संक्षेप)
ॐ श्रीं नमो भगवत्यै चण्डिकायै च चण्डिके नमः ॥
उपयोग: चंडी/चामुण्डा की आराधना में सामान्य समर्पण मंत्र।
देवी महात्म्य आरम्भ‑मंत्र (पाठ आरम्भ में अक्सर लिया जाता है)
ॐ नमो भगवत्यै चण्डिकायै स्वाहा ॥
उपयोग: पाठ/हवन के आरम्भ में समर्पण और आह्वान हेतु।
शक्तिस्वरूप बीज (ह्रीं)
ॐ ह्रीं नमः ॥
उपयोग: दिव्य उर्जा और आंतरिक शक्ति जागरण के लिये (अनेक मंत्रों के साथ बीज रूप में जपा जाता है)।
संक्षिप्त सुरक्षा‑मंत्र (Devi Protection)
ॐ श्रीं क्लीं देवी नमोऽस्तुते ॥
उपयोग: सार्वत्रिक रक्षा‑संकल्प एवं आशीर्वाद के लिये।