श्री राधा चालीसा (Shri Radha Chalisa)
॥ दोहा ॥ श्री राधे वृषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार। वृन्दावनविपिन विहारिणी, प्रणवों बारंबार॥ जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिया सुखधाम। च...
पढ़ें →चालीसा में चालीस छंदों में देवी-देवता की स्तुति की जाती है। हनुमान चालीसा सबसे लोकप्रिय है। गणेश, शिव, राम, कृष्ण, दुर्गा और लक्ष्मी चालीसा भी प्रसिद्ध हैं। चालीसा पाठ करने से मन में शांति आती है और भक्ति में वृद्धि होती है।
॥ दोहा ॥ श्री राधे वृषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार। वृन्दावनविपिन विहारिणी, प्रणवों बारंबार॥ जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिया सुखधाम। च...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज। वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज॥ जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि। कृपा करहु वर...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब। सन्तजनों के काज में, माँ करती नहीं विलम्ब॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय जय जय विन्ध्याचल रानी...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय‑जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान। होय विमल शीतल हृदय, विकासै बुद्धि बलज्ञान॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय‑जय‑जय शीतला भवानी —...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय जय तुलसी भगवती, सत्यवती सुखदानी। नमो नमो हरि प्रेयसी, श्री वृन्दा गुण खानी॥ श्री हरि शीश बिरजिनी, देहु अमर वर अम्ब। जनहित ...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। ...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरी गंग। जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय जय जननी हराना अघखानी — आनंद कर...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस॥ ॥ सोरठा ॥ यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुँ। सब ...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शान्ति कान्ति जागृत प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥ जगत जननी मङ्गल करनि, गायत्...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्री गुरु पद नमन करि, गिरा गणेश मनाय। कथूं रामदेव विमल यश, सुने पाप विनशाय॥ द्वार केश से आय कर, लिया मनुज अवतार। अजमल गेह बधाव...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरण सरोज छवि, निज मन मन्दिर धारि। सुमरि गजानन शारदा, ग्रहि आशिष त्रिपुरारि॥ बुद्धिहीन जन जानिये, अवगुणों का भण्डा...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय॥ जय जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज। जयति ...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय ब्रह्मा, जय स्वयम्भू — चतुरानन सुखमूल। करहु कृपा निज दास पै — रहहु सदा अनुकूल॥ तुम सृजक ब्रह्माण्ड के — अज विधि घाता...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूँ, दीजै ज्ञान बताय॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ नमो विष्णु भगवान खरारी — कष्ट नश...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अंग। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय सविता जय जयति दिवाकर — सहस्...
पढ़ें →॥ चौपाई ॥ श्री रघुबीर भक्त हितकारी — सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी। निशि‑दिन ध्यान धरै जो कोई — ता सम् भक्त और नहीं होई। ध्यान धरें ...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल, पिताम्बर शुभ साज॥ जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज। करहु क...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु क...
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